Madhya Pradesh के Jam Gate पर विज्ञान का अचंभा, अपने आप ढलान पर चढ़ जाते हैं वाहन
जाम गेट के पहले मोड़ पर ऐसा महसूस तो होता है कि गाड़ी थोड़ी दूर खुद की गति से चल रही है। हालांकि पहले कभी ध्यान नहीं दिया। इस घाट पर दो मोड़ ऐसे हैं जिसमें ऐसा प्रतीत होता है। यहां न्यूट्रल में वाहन होने पर भी वाहन गति बनाए रखता है। घाट के नीचे ढाबा संचालन करने वाले राकेश चौहान व ग्रामीण ओम प्रकाश पाटीदार ने बताया कि कई बार माताजी के दर्शन करते जाते समय ऐसा अहसास हुआ, लेकिन कभी ध्यान नहीं दिया।
अहिल्या ने बनवाया था जाम गेट
विंध्याचल की पहाड़ियों के स्थित घाट पर मार्ग का नवनिर्माण कुछ समय पूर्व ही हुआ है। जाम घाट स्थित जाम गेट का ऐतिहासिक महत्व है। जाम गेट व रोड का निर्माण महारानी अहिल्याबाई होलकर ने कराया था। वे इस मार्ग का उपयोग महेश्वर से इंदौर जाने के लिए करती थीं। जाम गेट को निमाड़-मालवा का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। इस ऐतिहासिक गेट को देखने निमाड़ और मालवा से हर वर्ष हजारों पर्यटक आते हैं। पहाड़ियों के बीच प्राचीन पार्वती माता मंदिर भी भक्तों की आस्था का केंद्र है। नवरात्रि में यहां कई आयोजन होते हैं।
कुछ कार चालकों ने यह दावा किया है। जीरो ग्रेविटी पृथ्वी पर दो पोल के बीच आंतरिक तौर पर होती है। भूमध्य रेखा के पास कभी-कभी ग्रेविटी फोर्स में बदलाव देखा गया है। इस घाट पर वैज्ञानिक आधार पर पुष्टि करने के लिए यंत्रों के द्वारा चिन्हित स्थानों पर अध्ययन और प्रयोग करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है


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