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Showing posts from July, 2021

मां की डांट के बाद किशोर फंदे से झूला:सुसाइड नोट में लिखा- फ्री फायर गेम में 40 हजार रुपए गंवा चुका हूं, आई एम सॉरी मां, आप रोना मत

 मां की डांट के बाद किशोर फंदे से झूला:सुसाइड नोट में लिखा- फ्री फायर गेम में 40 हजार रुपए गंवा चुका हूं, आई एम सॉरी मां, आप रोना मत मां ने ऑनलाइन गेम में पैसे खर्च करने को लेकर 13 साल के इकलौते बेटे को डांट क्या दिया, उसने फांसी लगा ली। मौके से सुसाइड नोट मिला है। किशोर ने फ्री फायर खेलते हुए 40 हजार रुपए गंवाने की बात लिखी है। साथ ही, लिखा है- आई एम सॉरी मां, डोंट क्राइ। ममाला मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले का है। सागर रोड पर विवेक पांडेय अपनी पत्नी प्रीति पांडेय, बेटे कृष्णा और बेटी के साथ रहते हैं। विवेक पैथालॉजी संचालक हैं, जबकि प्रीति जिला अस्पताल में हैं। कृष्णा 6वीं क्लास का छात्र था। शुक्रवार दोपहर 3 बजे पिता पैथोलॉजी पर थे, जबकि प्रीति अस्पताल में थीं। इसी दौरान मां को खाते से 1500 रुपए कटने का मैसेज मोबाइल पर मिला। मां ने घर पर मौजूद बेटे को फोन लगाया। पूछा कि ये पैसे क्यों कट गए। बेटे ने बताया, यह ऑनलाइन गेम के कारण कटे हैं। मां ने नाराजगी जताते हुए उसे डांट लगा दी। इसके बाद कृष्णा कमरे में चला गया। अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। घर में मौजूद बड़ी बहन ने कुछ देर बाद दरवाजा खटखट...

केदारनाथ मंदिर अनसुलझी संहिता

  केदारनाथ का रहस्य... ्केदारनाथ मंदिर एक अनसुलझी संहिता है। केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने करवाया, इसके बारे में कई बातें कही जाती हैं। पांडवों से लेकर आदि शंकराचार्य तक। लेकिन हम इसमें नहीं जाना चाहते। आज का विज्ञान बताता है कि केदारनाथ मंदिर शायद 8वीं शताब्दी में बना था। यदि आप ना भी कहते हैं, तो भी यह मंदिर कम से कम 1200 वर्षों से अस्तित्व में है। 21वीं सदी में भी केदारनाथ की भूमि भवन शिल्प के लिऐ सही नहीं है। एक तरफ 22,000 फीट ऊंची केदारनाथ पहाड़ी, दूसरी तरफ 21,600 फीट ऊंची कराचकुंड और तीसरी तरफ 22,700 फीट ऊंचा भरतकुंड है। इन तीन पर्वतों से होकर बहने वाली पांच नदियां हैं मंदाकिनी, मधुगंगा, चिरगंगा, सरस्वती और स्वरंदारी। इनमें से कुछ इस पुराण में लिखे गए हैं। यह क्षेत्र "मंदाकिनी नदी" का एकमात्र भूखंड है। भवन शिल्प कलाकृति कितनी गहरी रही होगी। ऐसी जगह पर भवन कलाकृति बनाना,  जहां ठंड के दिन भारी मात्रा में बर्फ हो और बरसात के मौसम में बहुत तेज गति से पानी बहता हो। आज भी आप गाड़ी से उस स्थान तक नहीं जा सकते जहां आज "केदारनाथ मंदिर" है। इसे ऐसी जगह क्यों बनाया गया...

Madhya Pradesh के Jam Gate पर विज्ञान का अचंभा, अपने आप ढलान पर चढ़ जाते हैं वाहन

Madhya Pradesh के Jam Gate पर विज्ञान का अचंभा, अपने आप ढलान पर चढ़ जाते हैं वाहन Jam Gate यहां से मंडलेश्वर-इंदौर मार्ग पर विंध्याचल की पहाड़ियों में स्थित जाम घाट पर विज्ञान का अचंभा देखने को मिल रहा है। कुछ वाहन चालकों ने दावा किया है कि घाट पर वाहन न्यूट्रल में भी चढ़ रहे हैं, जबकि इस स्थिति में वाहन को पीछे की ओर जाना चाहिए। पिछले तीन दिनों से यह चर्चा अधिक है। पिछले कुछ वर्षों से इस मार्ग पर छोटे वाहनों की आवाजाही तेजी से बढ़ी है। घटना को लेकर गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत कुछ स्थानों पर शून्य दिखाई देता है, जबकि कुछ लोग इसे दैवीय चमत्कार भी मान रहे हैं। हालांकि वैज्ञानिक तौर पर अब तक किसी ने इस घटना और कारणों की पुष्टि नहीं की है। जाम घाट स्थित पार्वती माता मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों ने बताया कि माताजी के मंदिर निर्माण के लिए अकसर घाट पर से जाना होता है। जाम गेट के पहले मोड़ पर ऐसा महसूस तो होता है कि गाड़ी थोड़ी दूर खुद की गति से चल रही है। हालांकि पहले कभी ध्यान नहीं दिया। इस घाट पर दो मोड़ ऐसे हैं जिसमें ऐसा प्रतीत होता है। यहां न्यूट्रल में वाहन होने पर भी वाहन गति बनाए रखता है। घाट के ...